संवाददाता :– राहुल कुमार, नमस्कार भारत


जहा शाहजहां और मुमताज की असली मजार हैं वह तहखाना शाहजहां के सालाना उर्स के दौरान खोला जाता है |वहीं हिंदू संगठन इस मामले को लेकर कोर्ट में पहुंच गई हैं।

ताजमहल में सालाना उर्स


ताजमहल में सालाना उर्स के मामले को लेकर विवाद चल रहा है । इसी बात को लेकर भारतीय हिंदू महासभा ने ताजमहल में सालाना उर्स पर रोक लगाने के लिए आगरा कोर्ट में याचिका दायर कर दी है । हिंदू संगठन के तरफ से याचिका में मांग गई है की बिना एएसआई के अनुमति के बिना ताजमहल में उर्स आयोजन नहीं होना चाहिए। ताजमहल का तहखाना तब ही खोला जाता है । जब शाहजहां की पुण्यतिथि के मौके पर इस उर्स का आयोजन होता है। इस मामले को आगरा जिला अदालत के सिविल जज के सामने लिस्ट किया गया है । वहीं उर्स का आयोजन 6 फरवरी को ही होने जा रहा है । बता दे की 31 मार्च को मामले की अगली सुनवाई होने है ।

बादशाह शाहजहां का सालाना उर्स क्या होता हैं

कहा जाता है कि बादशाह शाहजहां ने अपने बेगम मुमताज से इतनी मोहब्बत करते थे । उनके याद में ही यमुना के किनारे ताजमहल बनवाया था । 1631 में मुमताज की मौत हुई थी। इसके बाद शाहजहां ने एक साल बाद ताजमल काम शुरू करवा दिया था । हालांकि इसे पूरा होने में 30 साल वक्त लग गया और यह 1652 में बनकर तैयार हुआ । इसके 14 साल बाद 1666 में शाहजहां की भी मौत हुई तो ताजमहल के अंदर ही मुमताज की कब्र के बगल में उनकी भी कब्र बनाई गई । ताजमहल परिसर में 6 से 8 फरवरी तक 369वें उर्स का आयोजन होने जा रहा है। इस दौरान लोगों को शामिल होने के लिए टिकट भी खरीदना पड़ता है।

उर्स के मौके पर खुलता है ताजमहल का तहखाना

ताजमहल का रहस्यमय तरवाजा उर्स के मौके पर खोला जाता है ताजमहल की मुख्य संरचना के ठीक बाहर फर्श पर स्थित एक भूमिगत मार्ग है जिसे जालीदार दरवाजे से बंदकर रखा गया है। यह दरवाजा उर्स के मौके पर ही खोलता है । जालीदार
दरवाजे से बंदकर रखा गया है । दरवाजे के अंदर इसे लकड़ी के एक बोर्ड से ढक दिया गया है जिसके चलते अंदर कुछ दिखाई नहीं देता है । दरवाजा खुलने पर ही दिखाई देता है । अगर ताजमहल के अंदर आप जाते हैं तो वहां एक और विशाल मार्ग है जो नीचे की ओर जाता है । यह भी बंद कर रखा है । यहा पर लिखा हुआ है कि कृपया आप यहां न रुकें, शांत रहें और फोटोग्राफी वर्जित है । कहा जाता है की वही पर राजा शाहजहां और मुमताज की कब्रें है ।

उर्स के मौके पर फातिहा, मिलाद उन नबी और मुशायरा भी होता है । इस मौके पर मुमताज और शाहजहां की असली कब्र का रास्ता खोल दिया जाता है । वहीं याचिका में कहा गया है कि ऐतिहासिक धरोहर में इस तरह का धार्मिक काम नहीं किया जाना चाहिए ।

याचिका में कहा गया है कि समारोह की कमेटी ताजगंग सालाना उर्स मनाने की तैयारी कर रही है लेकिन इसके लिए सरकार और एएसआई से इजाजत नहीं ली गई है । वहीं इस कमेटी के अध्यक्ष भी किसी तरह से ताजमहल से जुड़े हुए नहीं है । वह न तो ताजमहल में कोई कर्मचारी हैं और न ही इस इमारत से उनका कोई जुड़ाव है । इसके बावजूद बिना इजाजत के कार्यक्रम को नायोजित करवाने जा रहे हैं।

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