संवाददाता: रवि गौतम, नमस्कार भारत

श्रीराम कॉलेज के ललित कला विभाग के विद्यार्थियों द्वारा अनुपयोगी वस्तुओं से उपयोगी कला कृतियों का निर्माण किया गया है। जिस कारण कला कृतियों के माध्यम से अनुपयोगी वस्तुओं को उपयोग एवं पर्यावरण को संतुलित करने संबंधी कौशल ललित कला द्वारा अपने विद्यार्थियों को शिक्षण शैली और कार्य शैली के माध्यम से निरन्तर दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए कॉलेज प्रांगण में चार अलग अलग कलाकृतिया अनुपयोगी वस्तुओं की मदद से ललित कला के विद्यार्थियों द्वारा बना संस्थान में स्थापित की गई हैं।

 ललित कला विभाग के विद्यार्थियों विशाल,अविनाश ज्ञान एवं राजीव ने विभाग के प्रवक्ता अजित कुमार के मार्गदर्शन में वेस्ट टॉयर से स्कल्पचर बनाकर तैयार किया है। जो एक वारियर के रूप में है। जिसके माध्यम से समाज में यह संदेश देने का प्रयास किया है कि अपनी प्रकृति की रक्षा के लिए हम सभी को वारियर के रूप में भूमिका निभानी चाहिए।

वही ललित कला विभाग के आलोक ,मुकुल,रविता और राजन आदि विद्यार्थियों ने विभाग के प्रवक्ता मयांक सैनी के मार्गदर्शन में एक स्कल्पचर बटरफ्लाई के रूप में बनाया है जो संदेश देता है कि हमें पृथ्वी को इतना सुन्दर बनाने का प्रयास करना है कि जिसमें विभिन्न रंगों के साथ उड़ती हुई तितली हम सभी के जीवन में खुशियों के रंग बिखेरती रहे।

प्रकति को और पास लाने के लिए ललित कला विभाग के इशिका, श्रुति,विधि और तनवी आदि विद्यार्थियों ने विभाग के प्रवक्ता रजनीकांत के मार्गदर्शन में वेस्ट प्लास्टिक बॉटल्स से लगभग 20 फीट के जिराफ का निर्माण किया है जिसके माध्यम से समाज को प्लास्टिक से फैलने वाले प्रदूषण को रोकने का संदेश देने का उद्देश्य है कि धरती को प्लास्टिक से कैसे मुक्त किया जा सकता है। इस विषय पर जानकारी देते हुए विभाग के निदेशक डॉ मनोज धीमान ने बताया कि ललित कला विभाग द्वारा 25 फीट की डॉल्फिन बनायी जा रही है जिसका उद्देश्य विलुप्त होती डॉल्फिन के अस्तित्व को बचाने के लिए समाज को संदेश देना है। उन्होंने बताया कि जल्द ही 25 फीट की डॉल्फिन श्रीराम कॉलेज में स्थापित की जाएगी।

उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए अपने विद्यार्थियों एवं स्कल्पचर के प्रवक्ता अजीत कुमार के साथ मिलकर अभी ऐसे बहुत से प्रोजेक्ट की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं और आशा करते हैं कि हमारा प्रकृति के और करीब आने एवं प्रकृति की रक्षा का सन्देश जो हम समाज में देने का कार्य कर रहे हैं वो पूर्ण कर सके।      उन्होंने बताया कि प्रकृति और कला एक मुद्रा के दो पहलू के समान हैं। जिसमें से कला मूर्ति प्रकृति के साथ कोने-कोने में जुड़ी रहती है। जीवन जीने के लिए सभी को पहले अपनी प्रकृति को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज प्रकृति में आये दिन बदलाव हो रहें हैं जिससे हम सभी के जीवन में भी बहुत से बदलाव देखे जा रहे हैं। लेकिन यदि मनुष्य चाहे तो अपनी प्रकृति की रक्षा करने के लिए बहुत कुछ कर सकता है। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा बनाई कलाकृत्यों का अवलोकन कर उनको उनके शानदार रचनात्मक कार्य की बधाई दी एवं उनका मार्गदर्शन करने वाले शिक्षकों को भविष्य में विद्यार्थियों के कौशल विकास के लिए प्रेरित किया।

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