संवाददाता: कुमार विवेक नमस्कार भारत
आज के ही दिन ब्रिटिश सरकार द्वारा लॉर्ड कार्नवालिस को भारत का गवर्नर जनरल बनाया गया। इनको पिट्स इंडिया एक्ट के तहत शांति स्थापना तथा शासन के पुनर्गठन हेतु जनरल बनाकर भारत भेजा गया ।
इससे पहले अमेरिका में, एक ब्रिटिश सेना अधिकारी, प्रशासक और राजनयिक रह चुके थे जिन्होंने पहले अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अपने देश की सेवा की थी।
कार्नवालिस अपने सैनिकों के साथ यॉर्कटाउन में अमेरिकियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। इस घटना के बाद अंग्रेजी सरकार ने ये घोषणा की उन्हे भारत भेजा जाएगा
1786 में लॉर्ड ने ब्रिटिश सरकार की प्रस्ताव अपने शर्तो के साथ स्वीकार किया की मुझे सर्वोच्च सैन्य का भी मुखिया बनाया जाए। पहली बार 1786 – 1793 तक था दूसरी बार 1805 में नियुक्त किए गए थे l
लॉर्ड कार्नवालिस के द्वारा भारत में की गई सुधार

लॉर्ड कार्नवालिस ने अपने शासन काल में कई सुधार किए सबसे पहले न्यायिक सुधार में ज़िले की पूरी शक्ति कलेक्टर को सौप दी
व 1787 में प्रभारी कलेक्टरों को दीवानी अदालत का दीवानी न्यायधीश नियुक्त कर दिया ।
1793 में प्रसिद्ध कार्नवालिस कोड का निर्माण करवाया और कलेक्टरों की शक्ति को कम करते हुए अब उनके पास मात्र कर से संबंधी शक्तियां ही रहने दी
लॉर्ड कार्नवालिस ने पुलिस सुधार करते हुए कंपनी के अधिकारियों के वेतन बढ़ाया और ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकार प्राप्त जमींदारों को इस अधिकारों से वंचित कर दिया। अंग्रेज मजिस्ट्रेटों को ज़िले की पुलिस का कमान दे दिया गया। 400 वर्ग मिल का कर दिया गया और जिलों में पुलिस थाना की निर्माण किया गया जिसका प्रभारी दरोगा को बनाया गया । लॉर्ड कार्नवालिस को पुलिस व्यवस्था का जनक भी कहा जाता हा।
स्थाई भूमि कर व्यवस्था
बंगाल में भू – राजस्व वसूली का अधिकार किसे दिया जाए और कितने समय तक दिया जाए , इस पर अंतिम फैसला लॉर्ड कार्नवालिस ने सर जॉन शोर के सहयोग से किया ,और अंतिम रूप से जमींदारों को भूमि का मालिक मान लिया गया , लेकिन जेम्स ग्रांट ने इस फैसला का विरोध कार्य हुए जमींदारों को केवल भूमिकर संग्रहकर्ता ही माना था, समस्त भूमि को सरकन की भूमि के रूप में मान्यता दी ।
1790 में दस वर्ष की व्यवस्था की गई ,जिसे जॉन शोर की व्यवस्था के नाम से भी जाना जाता है । परंतु इसको 1793 में स्थाई बंदोबस्त में परिवर्तित कर दिया गया।
ईस्ट इंडिया कंपनी में हो रहे भ्रष्टाचार को कम करने के लिए कार्नवालिस को ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा दी जाने वाली सेवाए का अधिकार दिया गया और कंपनी की निजी व्यापार पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया जिसे भ्रष्टाचार में काफी कमी आई
