संवाददाता :कुमार विवेक, नमस्कार भारत

राजकुमारी अमृत कौर आजाद भारत की प्रथम स्वास्थ्य मंत्री , राजनेता , स्वतंत्रता सेनानी व सामाजिक कार्यकर्ता थी । भारत जब गुलामी की मार झेल रहा था, और कई स्वत्रंता सेनानी सहीद हो चुके थे । उसी समय उनका जन्म एक साही परिवार में 2 फरवरी 1887 में हुआ था।

 राजकुमारी का पूरा नाम राजकुमारी अमृत कौर आहलुवालिया था , इनका जन्म भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुआ था । कौर की उच्च शिक्षा इंग्लैंड की ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में हुआ था। अपनी डिग्री समाप्त करने के बाद वह  भारत लौटी।

स्वास्थ्य मंत्री रहते प्रमुख कार्य

स्वास्थ्य मंत्री रहते अमृत कौर ने भारत को एक ऐसा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ( AIIMS ) की स्थापना में प्रमुख भूमिका निभाई  एम्स की स्थापना के लिए लोकसभा में एक विधेयक लाई। जिसके बाद भारत सरकार द्वारा  राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण कराने के बाद की गई सिफारिश के लिए कौर ने एम्स की स्थापना के लिए धन जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई , न्यूजीलैंड,ऑस्ट्रेलिया, पश्चिमी जर्मनी ,स्वीडन और संयुक्त राज्य अमेरिका से सहायता प्राप्त की और उनके भाइयों में से एक ने अपनी पैतृक संपत्ति और घर हिमाचल प्रदेश में संस्थान कर्मचारियों और नर्सों के लिए अवकाश घर के रूप में दान कर दिया।

कौन कौन से पद पर रही थी

कौर कई अन्य पदों पर आसीन थी एक स्वास्थ्य मंत्री , 1945 में  यूनेस्को की बैठकों में शामिल होने के लिए जो भारतीय प्रतिनिधि मंडल लंदन गया था उसकी डिप्टी लीडर थी फिर यह प्रतिनिधिमंडल यूनेस्को की सभाओं में भाग लेने के लिए पेरिस गया था । उस समय भी उस मंडल की उपनेत्री थी और 1948 – 49 में आल इंडिया कॉन्फ्रेंस ऑफ सोशल वर्क की अध्यक्षता रही थी व 1950 में वर्ल्ड हेल्थ असेंबली की अध्यक्षा निर्वाचित हुई।

1957 ई. में नई दिल्ली में उन्नीसवीं इंटरनेशनल रेडक्रास कॉन्फ्रेंस राजकुमारी अमृत कौर आहलुवालिया की अध्यक्षता में हुई। 1950 ई. से 1964 ई तक वह लीग ऑफ रेडक्रास सोसाइटीज की सहायक अध्यक्ष रहीं। वह 1948 ई. से 1964 तक सेंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड की चीफ कमिश्नर तथा इंडियन काउंसिल ऑफ चाइल्ड वेलफेयर की मुख्य अधिकारिणी रहीं। साथ ही वह आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस की अध्यक्षा भी रहीं।

स्वतंत्रता आंदोलनों में भूमिका

विभिन्न भारतीय स्वतंत्रता आंदोलनों में भाग लेने के लिए, कौर को कई मौकों पर अंग्रेजों द्वारा कैद किया गया था। नमक सत्याग्रह के दौरान, उन्हें बंबई से उनकी भागीदारी के लिए गिरफ्तार कर लिया गया था । 1937 में, वह फिर से जेल गईं – इस बार राजद्रोह के आरोप में। कौर 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने के लिए जेल से लौट आईं। इस प्रक्रिया के दौरान उन्हें जिस क्रूर लाठीचार्ज का सामना करना पड़ा, उससे उनके स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा। आख़िरकार, उन्हें जेल से बाहर लाया गया और शिमला में नज़रबंद कर दिया गया।

खेलो में था बहुत रूचि

राजकुमारी को खेलो से बड़ा प्रेम था । नेशनल स्पोर्ट्स क्लब ऑफ इंडिया की स्थापना कौर ने की थी , और इसकी अध्यक्षा शुरू से ही रही । उनको टेनिस खेलने का बहुत ही शौक था ,कई बार उनको टेनिस चैंपियनशिप उनको मिली।

वे ट्यूबरक्यूलोसिस एसोसियेशन ऑफ इंडिया तथा हिंद कुष्ट निवारण संघ की आरंभ से अध्यक्षता रही थीं। वे गांधी स्मारक निधि और जलियाँवाला बाग नेशनल मेमोरियल ट्रस्ट की ट्रस्टी, काउंसिल ऑफ साइंटिफिक तथा इंडस्ट्रियल रिसर्च की गवर्निग बाडी की सदस्या, तथा दिल्ली म्यूजिक सोसाइटी की अध्यक्षा थीं।

गांधी जी से थी प्रभावित

अमृत कौर गांधी जी के स्वतंत्रता आंदोलनों से काफी प्रभावित थी  और उनके अनुवाई थी । 1916 में इंग्लैंड से वापस आने के बाद उनकी मुलाकात गांधी जी से हुई और उनसे बहुत प्रभावित हुई कुछ वर्ष बीतने के बाद , कांग्रेस में शामिल हो गई और गांधी जी के सचिव के रूप में 16 वर्षो तक काम किया । गांधी जी के ही सिफारिस पर ही भारत के पहले प्रधानमंत्री नेहरू जी के कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री के रूप में सेवाए दी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *