संवाददाता : राहुल चौधरी, नमस्कार भारत

आप को बताते चले कि जल्द ही उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू हो सकती है। हालंकि राज्यपाल ने यूसीसी विधेयक राष्ट्रपति को भेजा है। राजभवन की ओर से बहुत ही विचार के बाद विधायी विभाग को भेजा था। विधायी के माध्यम से ही राष्ट्रपति को भेजा गया है। बल्कि यह संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए बिल अनुमोदन के लिए राज्यपाल से राष्ट्रपति को भेजा गया। राष्ट्रपति से मंजूरी के बाद ये कानून बन जाएगा।

आप को बता दे कि उत्तराखंड विधानसभा से हाल में ही यूसीसी विधेयक बिल पास होने के बाद राजभवन की मंजूरी के लिए भेजा गया। अब इसे राष्ट्रपति भवन भेजा गया है। जहां इसे मंजूरी मिलने राज्य में यूसीसी कानून लागू हो जाएगा। उत्तराखंड में लागू होने के बाद देश के कई राज्यों में यूसीसी लाया जा सकता है। इसको लेकर कवायद शुरू हो गई है। यूसीसी लागू होने के बाद विवाह, तलाक, लिव इन रिलेशनसिप आदि कई मामलों में कानूनी प्रावधान बदल जाएंगे।

उत्तराखंड की अनुसूचित जनजातियों को इस कानून की परिधि से बाहर रखा गया है।बता दें कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनता से किए गए वायदे के अनुसार पहली कैबिनेट बैठक में ही यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का फैसला किया।

आप की जानकारी के लिए बता दे कि सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई। समिति ने व्यापक जन संवाद और हर पहलू का गहन अध्ययन करने के बाद यूसीसी के ड्रॉफ्ट को अंतिम रूप दिया है। इसके लिए प्रदेश भर में 43 जनसंवाद कार्यक्रम और 72 बैठकों के साथ ही प्रवासी उत्तराखंडियों से भी समिति ने संवाद किया।

सरकार का यह दावा है कि समान नागरिक संहिता विधेयक के कानून बनने पर समाज में बाल विवाह, बहु विवाह, तलाक जैसी सामाजिक कुरीतियों और कुप्रथाओं पर रोक लगेगी, लेकिन किसी भी धर्म की संस्कृति, मान्यता और रीति-रिवाज इस कानून से प्रभावित नहीं होंगे। बाल और महिला अधिकारों की यह कानून सुरक्षा करेगा।

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