संवाददाता: अनु सैनी नमस्कार भारत
Mahendergarh: एक पिता का अपने बच्चे के लिए त्याग और निस्वार्थ प्रेम किस हद तक हो सकता है, इसकी जीती-जागती मिसाल इस कहानी में देखने को मिलती है। यह कहानी उस पिता की है, जिसने अपने बीमार बेटे को बचाने के लिए वो कर दिखाया जो शायद ही कोई कर सके।
जन्म से ही गंभीर बीमारी से जूझ रहे इस मासूम को ज़िंदगी बचाने के लिए शरीर की गर्मी का सहारा चाहिए था। डॉक्टरों ने सलाह दी कि बच्चे को हर पल शरीर की गर्मी मिलनी चाहिए, वरना उसकी जान खतरे में पड़ सकती है। पिता ने अपने बेटे को पूरे 10 महीने तक सीने से चिपकाकर रखा।
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Mahendergarh: इस दौरान पिता ने अपनी नींद, थकान, आराम और जरूरतों की परवाह किए बिना केवल एक ही बात सोची—“बेटे की सांसें चलती रहें।” उनका स्नेह और समर्पण ही बेटे की जीवनरेखा बन गया।
यह कहानी सिर्फ एक पिता के त्याग की नहीं, बल्कि उस बेमिसाल प्रेम की भी है जो किसी किताब में नहीं लिखा जाता, लेकिन हर दिल को छू जाता है। ऐसे पिता न तो सुर्खियों में आते हैं, न ही तारीफों के मोहताज़ होते हैं। उनका प्यार ही दुनिया के लिए सबसे बड़ी मिसाल बन जाता है।
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