संवाददाता: कुमार विवेक, नमस्कार भारत

 मालदीव ने हाल ही में तुर्की से बेकरटार टीबी-2 लड़ाकू ड्रोन हासिल करना शुरू कर दिया है और मुइज्जू सरकार के इस कदम से भारत और मालदीव के बीच रिश्ते और खराब होने के आसार लग रहे है, क्योंकि मालदीव ‘चीनी धुनों पर नाचने’ की कोशिश कर रहा है।

तुर्की और मालदीव के बीच ड्रोन का किया गया ये सौदा, जिसे मालदीव हिंद महासागर में तैनात करने वाला है, माना जा रहा है, वो चीन के इशारे पर इससे भारत की जासूसी करने में  इस्तेमाल कर सकता है, जिसे मुइज्जू का प्रशासन अपनी सर्विलांस क्षमता को बढ़ाने के नाम पर एक रणनीतिक कदम बता रहा है।

मालदीव-तुर्की में ड्रोन डील समझौता हुआ

नवंबर 2023 में पदभार संभालने के फौरन बाद, राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने तुर्की को अपना पहला विदेश-यात्रा के लिए चुना था। वहां, उन्होंने विभिन्न सैन्य उपकरणों का निरीक्षण किया और कथित तौर पर सैन्य ड्रोन हासिल करने के लिए तुर्की की एक कंपनी के साथ समझौता किया था।

हालांकि मालदीव सरकार ने समझौते का खुलासा नहीं किया है, लेकिन तुर्की मीडिया ने बताया है, कि इस सौदे में मालदीव के सशस्त्र बलों की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए छह टीबी2 मानव रहित लड़ाकू हवाई वाहनों (यूसीएवी) के साथ एक कमांड कंट्रोल स्टेशन की आपूर्ति शामिल है।

इस सौदे के तहत, मालदीव के समुद्री क्षेत्रों की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए इन तुर्की ड्रोनों के संचालन की निगरानी के लिए नूनू एटोल माफारू में एक ड्रोन बेस स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। मालदीव सरकार के मुताबिक, तुर्की ने 3 मार्च को ये ड्रोन मालदीव को सौंप दिए हैं, जिसे फिलहाल नूनू एटोल में माफारू अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तैनात किया गया है।

मालदीव की मौजूदा मोहम्मद मुइज्जू की सरकार चीन के इशारों पर भारत विरोधी काम कर रही है और इस साल की शुरूआत में मोहम्मद मुइज्जू ने चीन की यात्रा भी की थी और उस दौरान सर्विलांस ड्रोन खरीदने के संकेत दिए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति मुइज्जू ने मालदीव के समुद्री इलाके की 24 घंटे निगरानी के लिए एक सर्विलांस सिस्टम स्थापित करने की योजना की घोषणा की है और इस महीने के अंत तक सर्विलांस सिस्टम स्थापित कर दिया जाएगा, जिससे मालदीव अपनी स्पेशल इकोनॉमिक जोन की निगरानी कर सकेगा।

मुइज्जू ने भारत से संबध बिगाड़े

पिछले साल मुइज्जू के सत्ता में आने के बाद मालदीव और भारत के बीच बढ़ते तनाव के बीच तुर्की ने मालदीव को ड्रोन की डिलीवरी की है। वहीं, सत्ता संभालने के बाद से मोहम्मद मुइज्जू ने लगातार भारत के खिलाफ जहर उगला है और भारतीय सैनिकों को देश से बाहर निकालने के लिए अभियान चलाया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने मालदीव के भीतर निगरानी विमान चलाने वाले सैन्य कर्मियों की वापसी शुरू कर दी है। अड्डू के सबसे दक्षिणी एटोल में तैनात पच्चीस भारतीय सैनिकों ने 10 मार्च से पहले द्वीपसमूह छोड़ दिया है।

मोहम्मद मुइज्जू ने चीन के साथ अपने नए गठबंधन को मजबूत करने के लिए और भी कदम उठाए और उन्होंने भारत के साथ हाइड्रोग्राफी समझौते से बाहर निकलने के घोषणा करने के बाद, चीन के साथ एक सीक्रेट “सैन्य सहायता” समझौता किया है, जो एक रणनीतिक पुनर्गठन का संकेत है। माना जा रहा है, कि इस समझौते के तहत मालदीव में अब चीनी सैनिकों की तैनाती होने वाली है।

 के साथ मिलकर अपने पिछले समझौतों के आधार पर हिंद महासागर में सर्विलांस कर सकता है, जो भारत के लिए बहुत बड़ी चिंता की बात होगी। लिहाजा, भारतीय एक्सपर्ट्स ने मोहम्मद मुइज्जू को आग से नहीं खेलने की चेतावनी दी है और कहा है, कि ऐसा करना मालदीव के भविष्य के लिए खतरनाक हो सकता है।

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