संवाददाता सुमन बाजपेयी, नमस्कार भारत
20 मई 2026 को दिल्ली स्थित आकाशवाणी भवन के प्रांगण में डॉ. दर्शनी प्रिया द्वारा लिखित पुस्तक, ‘प्रधानमंत्री मोदी के अनमोल रत्न’ ,भारत के अद्वितीय पद्मश्री, पर एक चर्चा का आयोजन किया गया। चर्चा में जुटे मनीषियों और साहित्य मर्मज्ञों ने पुस्तक की लेखिका डॉक्टर दर्शनी प्रिय की भूरि भूरि प्रशंसा की और कहा की इस तरह के और भी पुस्तक भविष्य में आने चाहिए जो संदर्भ ग्रंथ की तरह काम करेंगे और आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करेंगे।
चर्चा में साहित्य की विभिन्न विधाओं से जुड़े मनीषियों,साहित्य मर्मियों और शिक्षाविदों ने अपनी बात रखी। पुस्तक चर्चा में मुख्य रूप से डॉ. शोभा विजेंद्र सामाजिक कार्यकर्ता और लेखिका, प्रोफेसर विमलेश कांति वर्मा, वरिष्ठ भाषाविद, प्रोफेसर स्वर्ण सिंह, अंतरराष्ट्रीय संबंध केंद्र जेएनयू, वरिष्ठ भाषा अधिकारी राकेश यादव, वरिष्ठ कवि श्री नरेश शांडियाल एवं बेस्ट सेलर लेखक कमलेश कमल, हिंदी अकादमी के पूर्व उप सचिव श्री ऋषि कुमार शर्मा, कलाविद मालविका जोशी, वरिष्ठ कवित्री अलका सिन्हा आदि ने भाग लिया। कार्यक्रम में विशेष रूप से आकाशवाणी के उप सचिव जितेंद्र सिंह कटारा ने भी भाग लिया।
डॉ. शोभा विजेंद्र ने कहा कि यह पुस्तक न केवल सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि आने वाली पीढियों के लिए भी एक सांस्कृतिक दस्तावेज के रूप में काम करेगी। उन्होंने पढ़ने और साहित्य से जुड़े रहने के लाभों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि पुस्तकें तो कई लिखी गई हैं, पर राष्ट्र को समर्पित मौलिक काम से जुड़े लोगों को लेकर लिखी गई यह पुस्तक अपने आप में अनोखी है। यह जीवंत साक्षात्कार के जरिए परस्पर बातचीत के आधार पर लिखी गई है जो जीवन जीवन में श्रम और समर्पण, शील और तपस्या से जुड़कर किए गए कामों के परिणामों की याद दिलाती है। दूसरी ओर कला मर्मज्ञ और शिक्षाविद डॉ मालविका जोशी ने पुस्तक के कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा यह एक अनूठी पुस्तक है जो भारत के सांस्कृतिक गौरव का चलता फिरता आईना है। उन्होंने कहा कि पद्म सम्मान जैसे राष्ट्रीय सम्मान यदि उचित समय पर मिल जाए तो वह किसी भी व्यक्ति के लिए एक प्रेरणादाई तत्व के रूप में काम आ सकती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ भाषा विज्ञानी प्रोफेसर विमलेश कांति वर्मा ने पुस्तक की विशेषता पर बात करते हुए कहा यह लेखिका के अथक परिश्रम का परिणाम है कि पद्म सम्मान से जुड़े लोगों की जीवनी पर एक सुंदर पुस्तक बनकर तैयार हुई है। लेखिका ने देश के गांव-गांव,नगर नगर घूम कर वास्तविक कार्य करने वाले जान नायकों को एक पुस्तक में समेटा है जो जो आने वाली पीढियां के लिए एक दस्तावेज है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की और भी किताबें भविष्य में आनी चाहिए। चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कार्यक्रम में शामिल विशिष्ट अतिथि, बेस्ट सेलर लेखक एवं चर्चित भाषाविद, कमलेश कमल ने कहा कि पद्म सम्मान जैसा बड़ा सम्मान अब सामान्य लोगों तक अपनी पहुंच बना रहा है। उन्होंने ने जोर देते हुए कहा कि आने वाले समय में पुस्तक कलात्मक शीर्ष को छूएगी क्योंकि इसमें भारत के बेहतरीन जननायकों की सच्ची और असली कहानी है जो जीवन को प्रभावित करती हैं। जवाहरलाल नेहरू जेएनयू के प्रोफेसर स्वर्ण सिंह ने कहा की पुस्तक हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है और इस तरह के विषय पर पुस्तक लिखा जाना बहुत आवश्यक है क्योंकि साल 2014 के बाद जिस तरीके से पद्म पुरस्कारों का लोकतांत्रिक कारण हुआ है वह अभूतपूर्व है। ऐसे में राष्ट्र के असली नायको की कहानी जो पर्दे के पीछे थी जिन्हें प्रकाश मिलना आवश्यक था, वह पुस्तक के जरिए मिल गया है।
लेखिका और कवित्री अलका सिन्हा ने कहा कि भारत के कलात्मक और साहित्यिक इतिहास को जब भी लिखा जाएगा तब इस पुस्तक को एक संदर्भ ग्रंथ के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
श्री राकेश यादव ने इसे स्वदेशी, राष्ट्रीयता और राष्ट्र प्रेम से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि भीड़ में यह पुस्तक अपनी अलग पहचान बनाती है। यह युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का कार्य कर रही है इसके जरिए लेखिका ने लोक संपदा के लिए कार्य कर रहे नायकों को उनके कार्यों के जरिए पर्दे पर लाने का प्रयास किया है। पुस्तक की शीर्षक की सार्थकता को देखते हुए इसे सत्ता की स्पष्ट पैरोकारी और युगांतरकारी बदलाव के रूप में देखा गया जिससे हाशिए पर पड़े लोगों को भी पद्म सम्मान तक पहुंच बनाने में आसानी हुई है।
