संवाददाता: आलोक शुक्ला, नमस्कार भारत
आज सम्मुख सभागार में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली के मासिक “श्रुति” कार्यक्रम में एक प्रयोग की तरह प्रख्यात साहित्यकार /रंगकर्मी सच्चिदानंद जोशी और मालविका जोशी की संगीतमयी काव्य नाटक “यूं ही साथ चलते चलते” की प्रस्तुति देखना एक अलग अनुभव रहा , दोनों अपने हाथ में स्क्रिप्ट लेकर पढ़ते हुए अभिनय कर रहे थे तो बीच बीच में दोनों की कविताओं को आनंद गोस्वामी अपने संगीत निर्देशन में साथी दिव्यन तथा ह्रदया के साथ बड़ी ही खूबसूरती से सुरों में पिरोकर पेश कर रहे थे।

बाद में दर्शकों से बात करते हुए सच्चिदानंद जोशी जी ने बताया कि एक हिसाब से उन्होंने इस नाटक को मीटर में लिखा है क्यों कि आनंद जी ने पहले मालविका और मेरी कविताओं को संगीत में बांधा और जब इसे प्रस्तुत करने की बात आई तो ये हुआ कि इसके लिए कुछ नरेशन लिखा जाए और ऐसे में ये नाटक रचा गया। बता दें कि इस नाटक का कथानक मुख्य रूप से दोस्ती के बाद विवाह के बंधन में बंधे ऐसे पति पत्नी के बीच के जीवन पर रचा गया जिनके संबंध पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते उलझने लगते हैं।

अंत में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक श्री चितरंजन त्रिपाठी जी ने आभार व्यक्त करते हुए सबको अंग वस्त्र और पौधा देकर सम्मानित किया। इसी के साथ दर्शकों की भरपूर उपस्थित को देखकर अगली बार इसे अभिमंच में प्रस्तुत करने की बात कही। मंच संचालन डॉक्टर प्रकाश झा ने किया।
बता दें कि “श्रुति” एनएसडी के भावपूर्ण नाट्य पाठ और उसके लेखक से संवाद का एक बड़ा मंच है इसे इसी तरह और विस्तार देने की ज़रूरत है। इसे पहले इसी निमित्त शुरू किया गया था, फिर कतिपय कारणों से बंद हो गया और फिर शुरु हुआ ज़रूर लेकिन जिस निमित्त इसका आगाज किया गया था उस पर थोड़ा और ध्यान देना चाहिए।
( समीक्षक आलोक शुक्ला वरिष्ठ रंगकर्मी, लेखक, निर्देशक और पत्रकार हैं )
