संवाददाता: आलोक शुक्ला, नमस्कार भारत

मनोज कृष्ण मुंबई। सिने टॉकिंज़ कोंकण प्रांत की मासिक संगोष्ठी में इस बार डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म, ‘भारतीय गुरु शिष्य परंपरा’, के  प्रदर्शन ने दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ी। निर्माता कैप्टन प्रवीण चतुर्वेदी की ये फ़िल्म उनके प्राच्यम स्टूडियो के बैनर तले बनाई गई है।

सनद रहे चित्रपट आयाम-सिने सृष्टि भारतीय दृष्टि हर महीने के आखिरी शनिवार को एक लघु फ़िल्म या डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन करता है। इस बार 30 मार्च को ये कार्यक्रम हमेशा की तरह आराम नगर वर्सोवा स्थित मां स्टूडियो में संपन्न हुआ।

निर्माता कैप्टन प्रवीण चतुर्वेदी को, ‘लाइट्स अक्रॉस द सी’ (2016), ‘साहेब्स हू नेवर लेफ्ट’, (2023) और ‘ऑपरेशन गंगा बाय टेरिटोरियल आर्मी’ (2020) के लिए विशेष रूप से जाना जाता है ।

‘साहेब्स हू नेवर लेफ्ट’ फिल्म भारतीय स्वतंत्रता इतिहास के काले अध्याय को उजागर करती है।

 ‘भारतीय गुरु शिष्य परंपरा’ की निर्माता कंपनी प्राच्यम सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर आधारित दुनिया का पहला ओटीटी प्लेटफॉर्म है। प्राच्यम ने अब तक राष्ट्रवादी और धार्मिक विषयों पर 300 से अधिक फिल्में, वीडियो, धारावाहिक बनाकर भारतीय और दुनियाभर के भारतीय प्रवासियों के बीच लोकप्रियता हासिल की।

 ‘गुरु शिष्य परंपरा’ भारतीय प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा रही है। सल्तनत-मुग़लकाल से अंग्रेजी हुकूमत तक लगातार गुरु शिष्य परंपरा को मिटाने की कोशिश की गई। इस्लामिक लुटेरों  ने नालंदा विश्वविद्यालय को जला दिया। बावज़ूद इसके सनातन का परचम कैसे पूरी दुनिया में लहरा रहा है, यही दिखाने की कोशिश श्री चतुर्वेदी ने अपनी फ़िल्म में की है ।

बताते चलें, मरीन ऑफिसर से फिल्म निर्माता बने कैप्टन प्रवीण चतुर्वेदी का भारतीय संस्कृति  से गहरा जुड़ाव है। अपने गुरु के मार्गदर्शन में श्री चतुर्वेदी ने भारतीय दर्शन, संस्कृति और विज्ञान का गहन अध्ययन किया।  सेवा काल के दौरान ही वो फिल्म निर्माण की ओर प्रेरित हुए। इसी कड़ी में यूएससी और यूसीएलए में औपचारिक सिनेमाई प्रशिक्षण प्राप्त  किया। इसके बाद उन्होंने हॉलीवुड के कुछ शीर्ष स्टूडियो और पेशेवरों के साथ काम किया।

भारत की जीवंत सांस्कृतिक विरासत के प्रति अपने जुनून को सिनेमा के साथ जोड़ने के इरादे से आप विदेश से 2012 में भारत लौट आये और फिल्म निर्माण स्टूडियो मूनलाइट पिक्चर्स की सह-स्थापना की। बाद में भारतीय संस्कृति, विरासत, इतिहास, परंपराओं, दर्शन और विज्ञान पर फिल्में बनाने के लिए समर्पित स्टूडियो प्राच्यम लॉन्च किया।

कार्यक्रम की शुरुआत सर्वश्री अरुण शेखर (चित्रपट विधा प्रमुख और संस्कार भारती कोकण प्रांत उपाध्यक्ष), एक्टर-निर्देशक श्री एन. के. पंत,  प्रोडूसर निर्देशक श्री अजीत गौड़ और चित्रपट विधा संरक्षक श्री संजय वर्मा के हाथों दीप प्रज्जवलन से हुआ।

फ़िल्म की स्क्रीनिंग के बाद निर्माता कैप्टन प्रवीण जी के साथ विमर्श सत्र का संचालन अरुण शेखर जी ने किया। इस सत्र में डॉक्यूमेंट्री फिल्म के निर्माण की चुनौतियां और वर्तमान उपयोगिता पर गंभीर चर्चा हुई।

कार्यक्रम का संचालन अभिनेत्री, नृत्यांगना और उदघोषिका सुश्री कल्याणी कुमारी  और धन्यवाद ज्ञापन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत कला सेवा प्रमुख श्री योगेश कुलकर्णी ने दिया।

 कार्यक्रम में निर्माता-निर्देशक श्री मनोज चतुर्वेदी एवं चित्रपट विधा की श्रीमती ज्योति जेलिया, श्री विवेक पांडे, फ़िल्म संपादक वंदिता चक्रदेव, प्रचार प्रमुख श्री आकाश शुक्ला, सुश्री अदिति पुलतस्य, आर्टिस्ट सर्वश्री विद्या, किशोर जी, श्री तन्मय जागीरदार, कृष्णा उपाध्याय जी, चेतन जी, आशुतोष द्विवेदी जी, रतनलाल जी, बॉबी वत्स जी की उपस्थिति सराहनीय रही।

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