संवाददता:अनु सैनी, नमस्कार भारत
Recovery process: जब कोई व्यक्ति बैंक से कर्ज़ लेता है, तो उसे कर्ज़ की समय पर अदायगी करनी होती है। लेकिन अगर कर्ज़ लेने वाले की अचानक मृत्यु हो जाती है, तो यह सवाल उठता है कि कर्ज़ की वसूली किससे की जाएगी और कौन इसका भुगतान करेगा। इस स्थिति में कर्ज़ की अदायगी के लिए कई विकल्प और कानूनी उपाय हो सकते हैं।
Recovery process: कर्ज़ लेने वाले की मृत्यु के बाद सबसे पहली बात यह है कि यदि व्यक्ति ने जीवन बीमा पॉलिसी ली है, तो बीमा कंपनी कर्ज़ का भुगतान करने की जिम्मेदारी ले सकती है। ऐसे में बैंक को कर्ज़ की वसूली के लिए बीमा कंपनी से संपर्क करना होता है। बीमा कंपनी कर्ज़ के शेष बकाया राशि का भुगतान करती है, जिससे परिवार को कर्ज़ की चिंता से छुटकारा मिल जाता है।
Recovery process: अगर व्यक्ति ने कोई बीमा पॉलिसी नहीं ली है, तो स्थिति थोड़ी जटिल हो जाती है। इस मामले में कर्ज़ की अदायगी की जिम्मेदारी परिवार पर आ सकती है। हालांकि, बैंक के पास यह अधिकार होता है कि वह कानूनी रास्ते से कर्ज़ की वसूली कर सके। बैंक कर्ज़ की अदायगी के लिए परिवार से संपर्क कर सकता है या फिर गारंटर से कर्ज़ की वसूली कर सकता है।
गारंटर का महत्व
कभी-कभी, बैंक कर्ज़ देने से पहले गारंटर की भी आवश्यकता करता है। गारंटर वह व्यक्ति होता है जो कर्ज़ लेने वाले के असमर्थ होने पर कर्ज़ का भुगतान करता है। यदि कर्ज़ लेने वाले की मृत्यु हो जाती है और बीमा नहीं लिया गया है, तो गारंटर पर कर्ज़ चुकाने की जिम्मेदारी आ सकती है। इस स्थिति में गारंटर को कर्ज़ चुकाना पड़ सकता है, अन्यथा बैंक उसे कानूनी तरीके से परेशान कर सकता है।
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व्यवसायिक कर्ज़ में स्थिति
यदि किसी व्यवसायी ने बैंक से कर्ज़ लिया है और उसकी मृत्यु हो जाती है, तो कर्ज़ की वसूली के लिए बैंक व्यवसाय के वारिसों या नए मालिक से संपर्क कर सकता है। यदि कंपनी पर कर्ज़ था, तो कंपनी की संपत्तियों से भी कर्ज़ चुकता किया जा सकता है। यह स्थिति कंपनी के मालिक की मृत्यु के बाद आती है, और उसका समाधान कंपनी की स्थिति पर निर्भर करता है।
कानूनी रास्ते से वसूली की प्रक्रिया
अगर कर्ज़ की अदायगी नहीं की जाती है, तो बैंक कानूनी कदम उठा सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि बैंक सीधे परिवार से पैसे मांगने लगेगा, बल्कि बैंक को अदालत के जरिए कर्ज़ की वसूली का अधिकार होता है। बैंक पहले परिवार या गारंटर से संपर्क करेगा और फिर वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू करेगा। अगर स्थिति जटिल हो जाती है, तो बैंक कर्ज़ को डिफॉल्ट मान सकता है और अदालत के जरिए वसूली की प्रक्रिया को तेज कर सकता है।
कर्ज़ का भुगतान कैसे किया जा सकता है?
मृत्यु के बाद कर्ज़ चुकाने के कई विकल्प हो सकते हैं:
1. बीमा पॉलिसी: अगर कर्ज़ लेने वाले ने जीवन बीमा पॉलिसी ली है, तो बीमा कंपनी कर्ज़ का भुगतान करती है।
2. गारंटर: यदि कोई गारंटर है, तो वह कर्ज़ चुकाता है।
3. वारिसों से वसूली: अगर गारंटर नहीं है, तो बैंक परिवार से कर्ज़ की वसूली करता है।
4. व्यवसायिक कर्ज़: यदि कर्ज़ व्यवसाय से जुड़ा है, तो कंपनी की संपत्तियों से कर्ज़ चुकाया जाता है या नए मालिक से वसूली होती है।
कर्ज़ की अदायगी मृत्यु के बाद एक संवेदनशील मुद्दा होता है, लेकिन जीवन बीमा पॉलिसी लेने से यह प्रक्रिया सरल हो सकती है। इसके बिना, कर्ज़ की वसूली परिवार, गारंटर या कंपनी से की जाती है, और बैंक कानूनी रास्ते अपनाता है।
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