संवाददाता: अनु सैनी, नमस्कार भारत
Snake Bite: भारत में हर साल हजारों लोग सांप के काटे (Snake Bite)का शिकार होते हैं। खासतौर से बरसात के दिनों में ये घटनाएं अचानक बढ़ जाती हैं। गांवों और दूर-दराज के क्षेत्रों में तो चिकित्सा सुविधाओं की कमी के कारण यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। लेकिन ऐसे में एक देसी पौधा जीवनरक्षक साबित हो सकता है, जिसका उपयोग भारत में पारंपरिक चिकित्सा के रूप में वर्षों से किया जा रहा है।
इस पौधे का नाम है नागदौन (Leucas Aspera)। यह पौधा हरियाली वाले क्षेत्रों, खेतों के किनारे या झाड़ियों में आसानी से मिल जाता है। वर्षों से ग्रामीण लोग इसे “जहर का दुश्मन” मानते रहे हैं, और अब वैज्ञानिक शोध भी इसकी पुष्टि कर चुके हैं।
नागदौन: खेतों में उगने वाला जीवन रक्षक पौधा
नागदौन एक छोटा झाड़ी जैसा पौधा होता है, जिसकी पत्तियाँ हल्की रेशेदार और फूल सफेद रंग के होते हैं। इसे कुछ इलाकों में “ड्रोण पुष्पी” या “गुलदौदी” के नाम से भी जाना जाता है। यह पौधा दिखने में जितना साधारण लगता है, उसकी औषधीय ताकत उतनी ही असाधारण है।
इसमें पाए जाने वाले प्राकृतिक रसायन विष को निष्क्रिय करने की क्षमता रखते हैं। यही कारण है कि जब सांप के काटने (Snake Bite) जैसी आपात स्थिति आती है, तब नागदौन का प्रयोग तुरंत करने पर जान बच सकती है।
कैसे करें नागदौन का उपयोग?
सांप काटने की स्थिति में इस देसी उपाय को कैसे किया जाए इस्तेमाल, जानिए विस्तार से:
1. पहचानें पौधे को
नागदौन के पत्ते छोटे, हरे और नरम होते हैं, जिन पर हल्की सफेद झांइयां होती हैं। फूल आमतौर पर सफेद रंग के होते हैं।
2. ताजे पत्तों को पीसें
कुछ ताजे पत्तों को तोड़कर उन्हें हाथ से या सिलबट्टे पर पीस लें। जरूरत हो तो थोड़ी मात्रा में साफ पानी मिला सकते हैं।
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3. रस को घाव पर लगाएं
जिस स्थान पर सांप ने काटा है, वहां तुरंत इस पेस्ट या रस को लगाएं। यह विष को शरीर में फैलने से रोकता है।
4. थोड़ी मात्रा में पिलाया भी जा सकता है
कुछ इलाकों में नागदौन के रस को रोगी को एक-दो चम्मच की मात्रा में पिलाया भी जाता है, ताकि अंदरुनी विष को भी कम किया जा सके।
5. डॉक्टरी इलाज ज़रूरी है
यह उपाय सिर्फ प्राथमिक राहत के लिए है। जैसे ही इलाज संभव हो, रोगी को तुरंत अस्पताल ले जाएं और एंटी-वेनम इंजेक्शन दिलवाएं।
वैज्ञानिक भी कर चुके हैं इसकी पुष्टि
नागदौन पर किए गए कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि इसमें ऐसे यौगिक (compounds) पाए जाते हैं जो एंटी-वेनम, एंटी-बैक्टीरियल, और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण रखते हैं। रिसर्च बताती है कि यह पौधा विष के असर को धीमा करता है और इम्यून सिस्टम को एक्टिव करता है।
2019 में हुए एक बायोलॉजिकल रिसर्च के अनुसार, नागदौन का अर्क (extract) तंत्रिका तंत्र पर असर डालने वाले ज़हर को कुछ हद तक बेअसर कर सकता है। इस वजह से यह सांप काटने जैसी आपात स्थिति में एक प्रभावशाली देसी समाधान माना गया।
गांवों में क्यों है यह पौधा बेहद जरूरी?
भारत के हजारों गांव ऐसे हैं, जहां पास में अस्पताल या डॉक्टर की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में नागदौन जैसे औषधीय पौधे वहां के लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। बरसात के मौसम में लोग पहले से ही इस पौधे को घरों के आसपास उगाकर रखते हैं ताकि आपातकाल में उपयोग किया जा सके।
किन बातों का रखें ध्यान?
नागदौन का प्रयोग सिर्फ शुरुआत में करें, तुरंत इलाज के लिए डॉक्टर के पास जाना जरूरी है।
बहुत अधिक मात्रा में इसका सेवन न करें।
यदि रोगी बेहोश हो जाए या साँस लेने में तकलीफ हो, तो विलंब न करें।
हमेशा साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव का ध्यान रखें।
देसी ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का संगम जरूरी
सांप काटने की स्थिति में समय पर सही फैसला जीवन और मृत्यु का अंतर तय कर सकता है। नागदौन एक ऐसा देसी पौधा है जो शुरुआती राहत देने में बेहद उपयोगी है, लेकिन इसे सिर्फ घरेलू उपाय तक सीमित न रखें। आधुनिक इलाज यानी एंटी-वेनम और मेडिकल सहायता को नजरअंदाज करना खतरे को बढ़ा सकता है।
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