संवाददाता अनु सैनी, नमस्कार भारत
मोरना:—–पौराणिक तीर्थ नगरी में स्थित श्री शुकदेव आश्रम परिसर में आयोजित श्री राम कथा का वर्णन विश्व प्रसिद्ध सन्त मोरारी बापू द्वारा किया जा रहा है।शनिवार शाम कथा का शुभारंभ साधु सन्तो की उपस्थिति के बीच मंत्रोच्चार के उपरांत विधिवत रूप मे किया गया।
प्रथम दिवस कथा व्यास मोरारी बापू ने भगवान शुकदेव की कथा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि शुकदेव शब्द में शुक यानी तोता नामक पक्षी जुड़ा है पक्षी विचरण करते हैं।साधु भी विचरण करते हैं रामायण में अनेक स्थानों पर तुलसीदास जी पक्षियों का विशेष वर्णन किया है।शुक्रताल में वह छठी बार कथा कर रहे हैं । पतित पावनी गंगा तट पर शुकदेव मुनि की तपोस्थली पर कथा करने का उन्हें गौरव प्राप्त हो रहा है। शुकदेव भगवान में अनेक गुण विद्यमान है।सूर्य जैसा तेजस्वी जल जैसा तरल आकाश जैसा व्यापक पर्वत जैसा अटल धरती जैसा सहनशील सहनशील चरित्र है। भगवान की सेवा प्रत्यक्ष नहीं होती। मन्त्रो के द्वारा हम भगवान की शरणागति प्राप्त करते हैं।केवल साधु की सेवा प्रत्यक्ष होती है। गुरु की चरण रज की कृपा से नयन पवित्र हो जाते हैं। तब मनुष्य किसी की निंदा नहीं करता। सबकी वन्दना ही करता है। तुलसीदास जी से बढ़कर कोई वंदना करने वाला नहीं हो सकता ।हम धरती को माता कहते हैं इस प्रकार हम सब आपस में सहोदर हुए तो फिर निंदा किसी बनती ही नहीं है। जन्म कहीं भी हो कर्म से मनुष्य महान बन जाता है कर्म व जन्म दोनों महान हो ऐसे व्यक्ति तुलसीदास जी हैं। तुलसीदास जी ने प्रत्येक की वंदना की है तथा साधु की अनेक स्थानों पर विशेष वंदना की है साधु के अपमान को कृष्ण भगवान ने भी बर्दाश्त नही किया।साधु का अपमान होने पर सुदर्शनचक्र स्वयं ही चल जाता था।
ग्रहण करना व धारण करना दोनों अलग है। सेवा, श्रवण, ग्रहण ,धारण यह शास्त्रीय चिंतन है जो लिखा हुआ है इसका अर्थ समझने के लिए सहिंता को जानना होगा।
