रोहित त्यागी, नमस्कार भारत

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश की मुजफ्फरनगर पुलिस को अपराध और जालसाजी के खिलाफ एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। छपार थाना पुलिस और स्वात टीम (SOG) की संयुक्त कार्रवाई में फर्जी डिग्री और कूटरचित (फर्जी) दस्तावेज तैयार करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने इस मामले में ₹15,000 के इनामी व वांछित अपराधी समेत तीन शातिर आरोपियों को धर दबोचा है।
​पुलिस के हत्थे चढ़े ये तीन आरोपी
​पकड़े गए आरोपियों में गिरोह का मुख्य सरगना और अन्य डॉक्टर शामिल हैं, इमलाख उर्फ इमलाक: मुख्य आरोपी (₹15,000 का इनामी और वांछित) डॉ. वी.के. गौतम: बिना वैध डिग्री के अस्पताल संचालक, डॉ. मंसूर उलहक: फर्जी डिग्री का खरीदार व सहयोगी
बरामदगी का विवरण
​पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में संदिग्ध दस्तावेज और सामान बरामद किया है:
​विजिटिंग कार्ड: 32 पीस
​लेटरहेड: 6 खाली और 4 लिखित लेटरहेड
​मेडिकल रिपोर्ट: 4 अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट/कवर और 6 मरीजों की बुकलेट
​अन्य सामान: 3 मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल की गई एक कार
​पूछताछ में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
​पुलिस की कड़ी पूछताछ में आरोपियों ने अपने काले कारनामों को कबूल किया है:-
​बी.फार्मा और बीएएमएस की फर्जी डिग्रियां: मुख्य आरोपी इमलाख ने स्वीकार किया कि वह मोटी रकम लेकर लोगों को बी.फार्मा, डी.फार्मा और बीएएमएस (BAMS) की फर्जी डिग्रियां मुहैया कराता था। 6 लाख रुपये में खरीदी डॉक्टर की डिग्री: गिरफ्तार आरोपी डॉ. वी.के. गौतम ने कुबूल किया कि वह बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री के अस्पताल चला रहा था। उसने डॉक्टर बनने और समाज की आंखों में धूल झोंकने के लिए इमलाख को ₹6 लाख देकर फर्जी बीएएमएस डिग्री खरीदी थी।
​तीसरे आरोपी की भी संलिप्तता: डॉ. मंसूर उलहक ने भी फर्जी डिग्री रैकेट में अपनी सक्रिय भूमिका और सांठगांठ की बात स्वीकार की है।
​पुलिस का बयान:
“यह गिरोह सीधे तौर पर लोगों की सेहत और कानून के साथ खिलवाड़ कर रहा था। तीनों आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है और जल्द ही कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।”
​पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजने की तैयारी शुरू कर दी है।

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